लॉरेंस बिश्नोई सहित पांच बरी, तीन दोषी करार
Lawrence Bishnoi among Five Acquitted
सोनू शाह मर्डर:
चंडीगढ़, 18 फरवरी: Lawrence Bishnoi among Five Acquitted: करीब सात वर्ष पुराने चर्चित राजवीर सिंह उर्फ सोनू शाह हत्याकांड में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई सहित पांच आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि गैंग से जुड़े तीन आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। सजा पर फैसला 20 फरवरी को सुनाया जाएगा।
कौन बरी, कौन दोषी
बरी किए गए:
लॉरेंस बिश्नोई
धर्मेंद्र सिंह
अभिषेक उर्फ बंटी5
राजू बसोदी
दीपक रंगा
दोषी करार:
शुभम उर्फ बिगनी
मंजीत उर्फ मोटा
राजन उर्फ जाट
बरी और दोषी ठहराए गए चंडीगढ़, दिल्ली, अंबाला और गुजरात की विभिन्न जेलों में बंद बताए गए हैं।
यह था मामला :
28 सितंबर 2019 को बुरैल गांव, सेक्टर-45 स्थित कार्यालय में प्रॉपर्टी डीलर राजवीर सिंह उर्फ सोनू शाह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना में जोगिंदर सिंह और परमिंदर घायल हुए थे। करीब 14 राउंड फायरिंग हुई थी।
हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक वॉयस मैसेज सामने आया, जिसमें कथित तौर पर राजू बसोदी ने बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी ली थी।
चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद लॉरेंस बिश्नोई सहित आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। आरोप था कि हत्या जेल से संचालित नेटवर्क के जरिए योजनाबद्ध तरीके से करवाई गई।
ट्रायल के दौरान क्या हुआ :
मुख्य गवाहों की स्थिति
घायल गवाह जोगिंदर सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हो पाया।
उसकी पत्नी सुनीता ने कहा कि वह 12–13 वर्षों से अलग रह रही है और उसे पति के जीवित या मृत होने की जानकारी नहीं।
पैतृक गांव जींद में भी ठोस जानकारी नहीं मिली।
गवाह परमिंदर की मृत्यु रिपोर्ट 19 जनवरी 2026 को मिली, जिसके बाद उसे सूची से हटा दिया गया।
इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन साक्ष्य बंद कर दिए।
दो गवाह मुकर गए
होटल मैनेजर विपिन ने धर्मेंद्र को नहीं पहचान और अन्य गवाह चंदन ने भी किसी को भी नहीं पहचाना पुलिस ने सीसीटीवी भी ज़ब्त नहीं की थी l
जांच में खामियां
घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज जब्त नहीं की गई।
कथित वॉयस मैसेज के लिए आवाज के नमूने लिए गए, लेकिन फॉरेंसिक लैब नहीं भेजे गए।
मोहाली सेक्टर-80 के होटल रजिस्टर में धर्मेंद्र के हस्ताक्षर और आधार कार्ड की एंट्री थी; हैंडराइटिंग रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन रजिस्टर पुलिस रिकॉर्ड से गायब हो गया। बचाव पक्ष वकील अमित खैरवाल के मुताबिक शिकायतकर्ता और मृतक के भाई प्रवीण शाह ने तीन दोषी करार दिए गए राजन, मंजीत और शुभम की ही पहचान की थी, लेकिन उसके अलावा बाकी किसी अन्य के खिलाफ पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई।